नई ‌‌‌‌‌‌इबारत

मंगलवार, 29 मई 2018

भोपाल-बैरसिया मार्ग के आसपास बसी कॉलोनियों में नहीं हुआ ड्रेनेज-सीवेज का काम रोजमर्रा की जरूरत के लिए लांबाखेड़ा-नबीबाग के लोग हो रहे परेशान फोटो... सहित भोपाल। भोपाल-बैरसिया-सिरोंज मार्ग का अंतिम दौर का कार्य पूर्ण होने के है, जिसके कारण मार्ग के आसपास बसे लोग ड्रेनेज-सीवेज की समस्या से परेशान हो गये हैं। सडक़ मार्ग निर्माण के कारण जो नाला था उसमें सीमेंट कांक्रीट का मलबा भर जाने से ड्रेनेज-सीवेज का पानी का निकास रूक गया है। बार-बार इस बाबद सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार नगर निगम अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस मामले में शिकायत क्रमांक 5402963 और 5329783 की गई हैं पर इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि लम्बे समय से मार्ग न बनने से जूझ रहे बैरसिया वासी जहां मार्ग का काम लगभग पूरा होने से राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं भीषण गर्मी के दौर में ड्रेनेज और सीवेज का पानी निकास ना होने के कारण परेशान हो रहे हैं। गत वर्ष कॉलोनी के कई घरों में बारीश का पानी भर गया था, जिस पर भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में लांबाखेड़ा की कॉलोनी शारदा नगर में पानी कमर से ऊपर भर गया था जिसके बाद कॉलोनी में नाव चलाई गई थी और क्षेत्रीय पार्षद एवं समाजसेवी लोगों ने सामूहिक भोजन के पैकेट बनवाकर रहवासियों के भोजन की व्यवस्था की थी। यदि यही स्थिति रही तो क्षेत्रवासियों के घरों में ड्रेनेज-सीवेज के साथ-साथ बारीश का पानी घरों में भर जाएगा, और लांबाखेड़ावासियों को कॉलोनी और बैरसिया मार्ग से संपर्क टूट जाएगा। पूराने मकानों की 1 मंजिला भवन हुआ जमींदोज भोपाल-बैरसिया मार्ग बनने से पूर्व जो मकान बने हैं उन मकानों के एक मंजिला भवन करीब-करीब डूब क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। कॉलोनी की सीवेज को जोडऩे वाले नाले पर अतिक्रमण और मलवा भर जाने से नाला लगभग बंद हो चुका है। इस पर अतिक्रमणकारियों ने निर्माण कर लिया है, जिससे सफाई कार्य नहीं हो पा रहा है। सडक़ मार्ग के दोनों और बारीश का पानी निकालने के लिए जो समानांतर पानी बहने के लिए सीमेंट कांक्रीट की लाइन डाली गई है वह बहुत ऊंचाई पर है, जिससे पुराना नाला पूरी तरह से बंद हो चुका है। हो सकती है साल 2006 से भी ज्यादा भयावह स्थिति सीवेज-ड्रेनेज लाइन न बनने से आगामी बारिश के सीजन में ड्रेनेज-सीवेज और बारिश के पानी का निकास नहीं होने से साल 2006 में हुई बारिश की त्रासदी से भी ज्यादा भयावह छिटपूट बरसात में ही हो जाएगी। जिसके भय से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है।

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