
बात कुछ यूं है कि मैं अपने साथियों के साथ ऑफिस में बैठा था, काम अपनी प्रारंभिक रफ्तार में ही था। एक ओर से हमारे साथी ने आफिस के कमरे में प्रवेश किया। उससे पूछा कहां थे भाई साहब।
वहीं अलसाई हालत में जवाब दिया ऊपर गया था।
वह अपना वाक्य पूरा करता की हमारे सीनियर महोदय ने तपाक से कहा कि अब यदि ऊपर जाओ तो बापू से यहमत कह देना की उनका चश्मा चोरी हो गया।
ऑफिस में धीमी किंतु आश्चर्य भरी मुस्कुराहट फैल गई।
क्योंकि आज के दैनिक अखबार में यह खबर प्रकाशित हुई है कि बापू का वर्धा आश्रम से चश्मा चोरी हो गया है।
अब जाऊंगा तो बता दूंगा।
अबे बताने का मना किया है। वरना वहां फिर से अनशन शुरू हो जाएगा। और सारे भ्रष्टि पुलिसियों की शामत आ जाएगी। फिर कहने को सरकार अपना रूतबा पेश करेगी। मान-मनौव्वल होगी। और रातों-रात उनको भी कभी सिले हुए कपड़े (निश्चित ही महिला के) पहनकर भागने की कोशिश करना पड़ेगी। हर कोई अन्ना नहीं हो सकता है जो मान-मनौव्वल के बाद अपना अनशन समाप्त करें। वह जमाना शायद अब चुनिंदा आश्वासनों की भेंट चढ़ गया है। भ्रष्ट तंत्र है भ्रष्टाचार से ही जाएगा।
बात गांधीजी के चश्मे कि है। इस पर संजय दत्त को लेकर कोई न कोई फिल्म तो जरूर बनाने की ठानेगा। अब भाई गांधीजी का चश्मा है कुछ और नहीं। गांधीजी अब अखबार तो पड़ते नहीं होंगे। क्योंकि चश्मा तो यहीं था। भला हो भारतीय भ्रष्टायोग का जिन्होंने ऊपर वालों के यहां कम्प्यूटर-इंटरनेट, टी.वी. सुविधा नहीं दी। जिससे तात्कालिक समाचार या अन्य समाचारों से वे वंचित हैं। बार-बार इस आशय के समाचार विभिन्न समाचार चैनलों पर भी प्रसारित होते रहे हैं। पिछली बार जब सबसे गतिमान चैनल के सबसे सुपर संवाददाता ने जो लाइव टेलिकास्ट वहां से प्रसारित किया था उसमें भी इस आशय का विस्तृत वर्णन था। तब भी भ्रष्टायोग के कई शूरविरों ने खुलकर अपनी बात तो रखी थी पर अपने मातहतों के ढीले रवैये को ढाल के रूप में आगे कर अपनी ढीली पतलून को कस के सामने खड़े हो गए थे।
रही बात चश्मे की तो चश्मा बापू का था। वह सेवाग्राम वर्धा के आश्रम में था? वह तो बापू के साथ ही होना चाहिए था। वहां के किसी कर्मचारी को इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर होगी तो वह सफाई कर्मी (निश्चित ही असिक्षित जिसे बापू के चश्मे की कीमत का अंदाजा नहीं होगा) जो रोज वहां सफाई करता था। आश्रम के कर्ताधर्ता ने गत दिनों बताया कि चश्मे की खबर किसी कर्मचारी ने बाहर नहीं की तो फिर यह खबर बाहर कैसे निकल गई। आगे की कार्रवाई की सारी जानकारी जुटाई जाएगी। उस सख्स का पहले पता लगाया जाएगा जिसने यह खबर बाहर (मीडिया तक) फैलाई है। यदि आपको इस बारे में जानकारी हो तो कृपया आप बता दीजिए इस पर हम इनाम भी रखेंगे। आपका नाम गुप्त रखा जाएगा। हम भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म कर देने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। इसके हम पुलिस कार्रवाई पर भी विचार कर रहे हैं।
यदि मान लिया जाए कि गांधीजी यदि थाने में रिपोर्ट करने के लिए थाने जाएंगे क्या रिपोर्ट लिखी जाएगी। वह अपनी सहायिकाओं की मदद से यदि थाने पहुंच भी गए तो थानेदार अपनी मुछों पर ताव देते हुए उन्हें एक कुर्सी (थाने में रखी बेंच) पर बैठा देंगे और उनकी सहायिकाओं की इस कदर खातिरदारी करेंगे की उनकी सारी रिपोर्ट एक किताब बन जाएगी। उत्तर प्रदेश के लखीपुर खिरी पुलिस थाना की तरह न जाने क्या-क्या हरकतें होती और गांधीजी रिपोर्ट की इबारतें लिखी जा रही हैं बाबा के शब्द सुन-सुन कर बोराते रहते। रही बात चश्मे की तो चश्मा वहां था या नहीं यही विचार चल रहा हा। आगे की मिलने पर विस्तार से मिल बैठकर भ्रष्टाएंगे।
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