नई ‌‌‌‌‌‌इबारत

सोमवार, 5 अक्टूबर 2009

प्रदेश के विकास और आम आदमी की खुशहाली के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला मंथन 2009 का आयोजन

स्वर्णिम मध्यप्रदेश निर्माण के मुख्यमंत्री के सात संकल्प होंगे मंथन का मुख्य केन्द्र
Bhopal:Sunday, October 4, 2009:Updated 17:59IST

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पांच अक्टूबर को प्रात: 10 बजे आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला ''मंथन-2009'' का शुभारंभ करेंगे। प्रदेश के विकास के नए रास्ते तलाशने और आम आदमी की खुशहाली के सपनों को साकार करने के इस अनूठे आयोजन में मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, जिला कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यापालन अधिकारी सहित 200 अधिकारीगण भागीदारी करेंगे। मंथन में शामिल प्रतिभागी सात समूहों के अंतर्गत शासन की प्राथमिकताओं, विकास कार्यक्रमों, शासन की कार्यप्रणाली, नियमों, नीतियों और जन आकांक्षाओं के संबंध में समग्र विचार विमर्श करेंगे। मंथन के शुभारंभ के बाद प्रथम दिन निर्धारित समूहों में प्रतिभागियों के बीच समूह चर्चा होगी। मंथन के दूसरे दिन 6 अक्टूबर को सभी सात समूहों द्वारा अपनी-अपनी अनुशंसाओं का प्रस्तुतिकरण किया जायेगा।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश निर्माण के मुख्यमंत्री के सात संकल्प होंगे इस बार ''मंथन-2009'' का मुख्य केन्द्र
मंत्रिपरिषद के सदस्यों सहित 200 वरिष्ठ अधिकारी करेंगे ''मंथन-2009'' में भागीदारी
मंथन का यह दूसरा राज्य स्तरीय आयोजन है। इससे पहले विगत 13 और 14 जनवरी 2007 को मंथन कार्यशाला का आयोजन हुआ था। इस आयोजन के निष्कर्ष आज राज्य की प्रगति का मुख्य आधार बन चुके हैं। दो वर्षों के उपरांत अब पुन: इस आयोजन के जरिये समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सबसे कमजोर व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और आम लोगों की खुशहाली की दिशा में सकारात्मक पहल की जायेगी। मंथन में मैदानी अधिकारियों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर राज्य की तरक्की की नई शुरूआत होगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वर्णिम मध्यप्रदेश निर्माण के जो सात संकल्प लिए हैं वे ''मंथन-2009'' में विचार-विमर्श का मुख्य बिन्दु रहेंगे। इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री के इन्हीं सात संकल्पों पर आधारित सात समूहों का गठन किया गया है। ये हैं – (1) अधोसंरचना एवं विकास (2) निवेश वृद्धि (3) कृषि को फायदे का धंधा बनाना (4) शिक्षा और स्वास्थ्य (5) महिला सशक्तिकरण (6) सुशासन एवं संसाधन विकास (7) सुरक्षा और कानून व्यवस्था। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारीगण मो. सुलेमान, श्री प्रवीण गर्ग, श्री आई.एस. दाणी, श्री मनोज झालानी, श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, श्री अखिलेश अर्गल और श्री विजय कटारिया क्रमश: इन समूहों के सचिव बनाए गए हैं। सभी समूह ''मंथन'' के दौरान अपने-अपने समूहों के अध्यक्ष का चयन भी करेंगे। इन सात समूह में शामिल सभी अधिकारी अपने मैदानी अनुभवों और ज्ञान को एक दूसरे से साझा करते हुए प्रदेश के विकास तथा आम लोगों की तरक्की में आने वाले अवरोधों को दूर करने के उपाय सुझायेंगे। इनके आधार पर विभिन्न नीति, नियम प्रक्रियाओं में व्यावहारिक बदलाव लाने तथा कठिन नियम-कायदों को सरल बनाकर आम लोगों की पेरशानियों को कम करने की कोशिश की जायेगी।
प्रशासन में निचले स्तर तक सुशासन की दिशा में ''मंथन'' प्रदेश के विकास की प्रक्रिया का एक अहम माध्मम बनने जा रहा है। सुधार एक सतत प्रक्रिया है। ''मंथन'' के जरिए राज्य सरकार के क्रियाकलापों की समीक्षा उन्हें और बेहतर बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। विकास के मुद्दों पर शासन प्रशासन में आपसी विचार-विमर्श का यह महती आयोजन राज्य सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और योजनाओं के सार्थक क्रियान्वयन का बेहतर जरिया बनेगा। मंथन में मैदानी अधिकारियों के सुझाव और अनुशंसाऐं कार्यदलों के लिये नीतियां निर्माण करने में महत्वपूर्ण और उपयोगी सिद्ध होगी। इससे पहले जनवरी 2007 में आयोजित पहली मंथन कार्यशाला में भी सात विभिन्न समूहों का गठन कर राज्य की तरक्की और आम लोगों की खुशहाली की जिन नई संभावनाओं को तलाशा गया था, वे सभी आज सार्थक रूप ले चुकी हैं। पहली मंथन कार्यशाला में की गई अनुशंसाओं और उस दौरान मुख्यमंत्री की घोषणाओं का 60 फीसदी क्रियान्वयन हो चुका है। पहली मंथन कार्यशाला में आम आदमी के हक में राज्य की नीतियों में सकारात्मक बदलाव लाने और सुशासन के उद्देश्य से ''स्कूल ऑफ गुड गवर्नेंस'' स्थापित करने पर विचार किया गया था। सिर्फ दो वर्षों के दरम्यान यह कल्पना ना केवल साकार हुई वरन है ''मंथन-2009'' का सम्पूर्ण आयोजन इस बार इस संस्था के तत्वावधान में होने जा रहा है। इसके साथ ही स्कूल ऑफ गुड गवर्नेंस द्वारा ''गुड पॉलिसिज'' का दस्तावेज तैयार कर अपने उद्देश्यों को सार्थकता दी गई है। इसके साथ ही वेस्ट इनिशियेटिव्ह तथा इनोवेटिव्ह आइडियाज के लिये राज्य सरकार ने तीन पुरस्कार निर्धारित करने की पहल की थी। इस वर्ष उत्कृष्ट कार्यों के इन पुरस्कारों के वितरण की शुरूआत हो चुकी है। राज्य के अधिकांश विभागों द्वारा अपने परिपत्रों का विषयवार संकलन वेबसाईट पर किया जा रहा है तथा यह प्रकिया निरंतर जारी रखी जायगी।

पिछले मंथन में लिये गये निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के सभी निर्माण विभागों द्वारा टेंडर की स्वीकृति की प्रक्रिया और टेंडर दस्तावेजों में बदलाव की कार्यवाई शुरू कर दी गई है। नर्मदा घाटी विकास विभाग, लोक निर्माण तथा जल संसाधन विभाग द्वारा एस।ओ.आर. पुनरीक्षित किये जा रहे हैं। इससे इन विभागों की निविदा प्रक्रियाओं में व्यापक प्रतियोगिता की वजह से कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और समय सीमा में विकास कार्य पूर्ण होंगे। सभी निर्माण विभागों में एल.ओ.सी. की प्रथा भी समाप्त कर दी गई है। प्रदेश में निजी क्षेत्र के द्वारा निवेश वृद्धि के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में स्पेशल एज्युकेशन जोन के लिये अचारपुरा में भूमि आरक्षित की गई है और विभिन्न संस्थाओं को भूमि आवंटन भी किया जा चुका है। सेवनियॉ गौड, भोपाल तथा उज्जैन और इंदिरा सागर में टूरिज्म जोन बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शिक्षकों और पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया में संशोधन किया गया है। प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। प्रदेश में स्थित शहरी भूमियों के निवर्तन की नई नीति जारी की जा चुकी है। इसके साथ ही नगरीय विकास के लिए संभागायुक्तों एवं जिला कलेक्टरों को भूमि आवंटन के अधिकार प्रत्योजित किये गए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा निजी क्षेत्रों में नए मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज तथा पैरामेडिकल संस्थान खोलने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के साथ-साथ अन्य प्रोत्साहन भी दिये जा रहे हैं। राज्य में शिक्षा की सुलभता के लिये शिक्षकों की नियमित रूप से भर्ती की प्रक्रिया जारी है।


प्रदेश के 85 हजार बच्चों को दी जायेगी स्वास्थ्यवर्धक दवाईयां (बाल सुरक्षा माह)
Bhopal:Sunday, October 4, 2009:Updated 18:04IST

प्रदेश के 85 हजार बच्चों को बाल सुरक्षा माह 5 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच आंगनवाड़ी केन्द्रो के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक दवाईयां दी जायेंगी। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, आयुष एवं ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने यह जानकारी देते हुये बताया कि यह अभियान स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जायेगा।
स्वास्थ्य मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने और आयु के हिसाब से उन्हें जरूरी दवाईयां उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रदेश में 5 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक बाल सुरक्षा माह के रूप में मनाया जायेगा। उन्होंने बताया कि हर आंगनवाड़ी केन्द्र में 9 माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए का घोल पिलाया जायेगा तथा एक वर्ष से पांच वर्ष तक के बच्चों को अन्य जरूरी दवाईयां दी जायेंगी। इस माह के दौरान बच्चों का टीकाकरण भी किया जायेगा। साथ ही बच्चों की ग्रोथ मॉनीटरिंग आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा की जायेगी। उन्होंने बताया कि आयोडीन नमक के सेवन को प्रोत्साहित करने के लिये नमक में आयोडीन का परीक्षण भी इन केन्द्रों में किया जायेगा। बाल सुरक्षा माह के दौरान टीकाकरण की सूक्ष्म कार्ययोजना बनायी जायेगी और इसके तहत सभी मझरे, टोले एवं पहुँचविहीन गाँवों को चिन्हित कर उन्हें सम्मिलित किया जायेगा।
बाल सुरक्षा माह के दौरान अभिभावकों को जागरूक बनाने तथा प्रति बच्चे तक आयु के हिसाब से जरूरी दवाईयों की उपलब्धता का महत्व बताने के लिये जिला एवं विकासखंड स्तर पर युनीसेफ एवं महिला बाल विकास के समन्वय से कार्यशालाएं आयोजित की जायेंगी। इस अभियान को प्रभावी ढ़ंग से क्रियान्वित करने के लिये स्वास्थ्य तथा महिला बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक समन्वय कर चेक लिस्ट के आधार पर निर्धारित दिवसों पर होने वाली गतिविधियों की मॉनीटरिंग करेंगे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और जिला महिला बाल विकास अधिकारी भी बाल सुरक्षा अभियान की सतत मॉनीटरिंग करेंगे।

ले. गवर्नर श्री इकबाल सिंह को विधायनी का अंक भेंट, प्रथम बार विधानसभा सचिवालय की भागीदारी
Bhopal:Sunday, October 4, 2009:Updated 18:19IST

पांडिचेरी के राज्यपाल लेफ्टिनेंट गवर्नर श्री इकबाल सिंह ने आज तामिलनाडु के कोडाइकनाल में 22वें राजभाषा सम्मेलन का समापन किया। राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा के इस सम्मेलन में मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय, जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों सहित रूपाम्बरा के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। पूरे देश से विभिन्न संस्थानों, उपक्रमों के लगभग सवा सौ प्रतिभागियों ने इस तीन दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसके पूर्व सम्मेलन का उद्घाटन 2 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम ई.एम.एस. नरसिम्हन ने किया था।
म.प्र. विधानसभा की ओर से पहली बार रूपाम्बरा के सम्मेलन में भागीदारी की गई। विधानसभा के सूचना अधिकारी श्री दीपक दुबे ने पांडिचेरी के राज्यपाल ले. श्री इकबाल सिंह को विधानसभा सचिवालय की त्रैमासिक शोध पत्रिका विधायनी का नवीन अंक भेंट किया। इस अवसर पर रूपाम्बरा के राष्ट्रीय मानद अध्यक्ष श्री रत्नाकर पांडेय, अध्यक्ष श्री स्वदेश भारती और निदेशक श्री राजेन्द्र जोशी उपस्थित थे। सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में भी विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका विधायिनी का प्रदर्शन किया गया जिसकी साहित्यकारों ने प्रशंसा की।
सम्मेलन में मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग से श्री दिनेश मालवीय, ताहिर अली, अशोक मनवानी, चन्दर सोनाने ने भाग लिया। उन्होंने विभिन्न सत्रों में हिन्दी भाषा के संबंध में उद्बोधन दिया।
श्री दीपक दुबे, श्री अशोक मनवानी, श्री ताहिर अली, ने सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में हिन्दी की भूमिका तथा दिनेश मालवीय ने हिन्दी के प्रयोग और प्रचार-प्रसार में कठिनाईयां विषय पर व्याख्यान दिये। जनसंपर्क विभाग के सभी प्रतिभागियों ने कवि सम्मेलन में भी भाग लिया।


अर्द्ध सैनिक बलों के सैनिकों के आश्रितों को विशेष अनुकम्पा नियुक्ति का प्रावधान
Bhopal:Sunday, October 4, 2009:Updated 18:09IST

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि सैन्य अधिकारियों/सैनिकों के साथ-साथ अर्द्ध सैनिक बलों के सैनिकों के शहीद परिवारों को भी विशेष अनुकम्पा नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों, विभागाध्यक्षों एवं कलेक्टरों को 11 अक्टूबर, 2001 को जारी परिपत्र के बारे में स्पष्ट किया है कि युद्ध अथवा सैनिक कार्यवाही में शहीद होने वाले सैनिकों के परिजनों को वित्तीय एवं अन्य सहायता उपलब्ध कराने संबंधी परिपत्र में अर्द्ध सैनिक बलों का भी उल्लेख है। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 2001 में जारी परिपत्र के प्रावधान म।प्र. के मूल निवासी सैन्य अधिकारियों/सैनिकों के साथ-साथ अर्द्ध सैनिक बलों के सैनिकों के शहीद परिवारों के परिजनों के लिये भी लागू होंगे।


प्रशासन अकादमी में दो-दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ आज
Bhopal:Sunday, October 4, 2009:Updated 18:07IST

आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल द्वारा 'उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास की चुनौतियां' विषय पर 5 एवं 6 अक्टूबर, 2009 को दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। प्रशासन अकादमी सभागार में आयोजित यह संगोष्ठी का शुभारंभ सोमवार 5 अक्टूबर की दोपहर दो बजे होगा।
प्रशासन अकादमी, महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना ने जानकारी दी है कि संगोष्ठी के प्रथम दिवस 5 अक्टूबर सोमवार को पूर्व में उत्तर-पूर्वी राज्यों से संबद्ध रहे मध्यप्रदेश के अधिकारी श्री एस.सी. त्रिपाठी (आई.पी.एस.), श्री अतुल सिन्हा, पूर्व सचिव भारत सरकार तथा श्री के.के. सेठी, पूर्व मुख्य सचिव मणिपुर राज्य का संबोधन होगा।
दूसरे दिन 6 अक्टूबर मंगलवार को संगोष्ठी प्रात: दस बजे से प्रारंभ होगी। जिसमें मिजोरम के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एम।एम. लखेरा (सेवानिवृत्त) तथा नार्थ ईस्ट काउंसिल के सदस्य श्री पी.पी. श्रीवास्तव अपने विचार रखेंगे।


चित्रकूट में तुलसी भवन लोकार्पित
Satna:Sunday, October 4, 2009:Updated 20:25IST

चित्रकूट में तुलसी शोध संस्थान के नवनिर्मित तुलसी भवन का आज लोकार्पण हुआ। इस मौके पर प्रदेश की उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस, सांसद श्री अर्जुन सिंह, राजगुरू स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज, विधायक चित्रकूट श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार, सचिव म.प्र. संस्कृति विभाग श्री मनोज श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।
चित्रकूट स्थित तुलसी शोध संस्थान के तुलसी भवन का निर्माण सांसद श्री अर्जुन सिंह की सांसद निधि से प्रदत्त राशि 40 लाख एवं मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा प्रदत्त 5 लाख एवं जनसहयोग की राशि से किया गया है। इस अवसर पर श्री सिंह ने कहा कि संत तुलसीदास जी ने रामकथा के माध्यम से जीवन में त्याग, अनीति के विरूद्ध संघर्ष और गरीबो की सेवा का संदेश दिया है। महात्मा गॉधी जी ने रामराज्य के आदर्श को रामचरित मानस से ग्रहण किया था जो आज भी विश्व के लिये प्रासंगिक है। उन्होने कहा कि रामचरित मानस भारतीय दर्शन, अध्यात्म, नैतिक आदर्श, निगमागम का सार है और इसका अनुशीलन, शोध, संरक्षण और प्रचार आवश्यक है। तुलसी भवन और तुलसी शोध संस्थान के केन्द्र का यही उद्देश्य भी होना चाहियें। राजगुरू संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने इस अवसर पर आशीर्वचन दियें।
उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने संबोधित करते हुये कहा कि समाज को पूर्वजो से मिली संस्कृति की विरासत को संभालना बहुत बडी जिम्मेदारी है और इस विरासत को संरक्षित, संवर्धित करते हुये आने वाली पीढी को सौपना जरूरी है। श्रीमती चिटनीस ने आशा व्यक्त की कि तुलसी शोध संस्थान में नित नये शोध होगें और विद्वानो की विद्वता का लाभ सभी आमजन को मिलेगा।
श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी की स्मृति और श्रद्धा के रूप में स्थापित तुलसी शोध संस्थान भक्ति साहित्य के क्षेत्र में अनूठा योगदान देगा। उन्होने कहा कि चित्रकूट अंचल संत तुलसीदास की जन्मस्थली के साथ कर्मस्थली भी रहा है। उन्होने कहा कि ईश्वर के रहस्य की आख्या नही की जा सकती फिर भी तुलसीदास जी ने राम की झांकी दिखाकर ब्रम्ह को सभी की आँखों में उतार दिया। उन्होंने बताया कि तुलसी शोध संस्थान की स्थापना चित्रकूट में 1988 में की गई थी तथा 24 मई 2003 को तुलसी भवन की आधारशिला रखी गई थी। तुलसी शोध संस्थान में 6 हजार भक्तिमार्गी पुस्तके एवं 531 दुर्लभ पाण्डुलिपियो का संग्रह है, जो शोधार्थी एवं साहित्य जगत के लिये उपयोगी साबित होगें।
इस मौके पर संस्कृति सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों को बघेली शब्द कोष की प्रतियां भेंट की।

विद्यार्थियों ने वन विहार में देखे विभिन्न पक्षी प्रशिक्षु पत्रकारों ने पाया वन्यप्राणी प्रबंधन का प्रशिक्षण
Bhopal:Sunday, October 4, 2009:Updated 18:32IST

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वन्यप्राणी सप्ताह के चौथे दिन का शुभारंभ आज प्रातः 6 बजे पक्षी अवलोकन शिविर से किया गया। इस शिविर में 69 छात्र/छात्राओं एवं शिक्षकों ने भाग लिया। पक्षी अवलोकन कराने के लिये श्री जे.एस.चौहान, मुख्य वन संरक्षक, श्री एस.एस.राजपूत, मुख्य वन संरक्षक, एवं संचालक वन विहार, श्री सत्यानंद, वन संरक्षक डॉ. सुरेन्द्र तिवारी, पक्षीविद् तथा भोपाल बर्ड्स के मो. खालिक एवं कु. संगीता राजगीर पक्षी विशेषज्ञ के रूप में मौजूद थे। पक्षी विशेषज्ञों द्वारा छात्र/छात्राओं को पक्षी जगत का वर्गीकरण, उनकी विभिन्न शारीरिक बनावट के आधार पर विभिन्न वर्गों में विभाजन, पक्षियों के भोजन एवं अन्य विशेषताओं के बारे में बताया गया। शिविर में आये छात्र/छात्राओं द्वारा अपने ज्ञान में न सिर्फ वृद्धि की गई अपितु वे प्रकृति एवं पक्षियों की अनूठी दुनिया के प्रति आकर्षित भी हुये। बच्चों ने वन विहार में ग्रे होर्नविल, दूधराज, एसीप्रीनिया, रेड मुनिया, लेसर विसलिंग टील, हैरोन, ईग्रेट तथा किंग फिशर आदि पक्षी देखे।
दूसरी गतिविधि के रूप में प्रातः 11 बजे माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के प्रशिक्षुओं तथा जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षु शिक्षकों के लिये वन्यप्राणी प्रबंधन में कार्यशाला का आयोजन वन विहार में किया गया। इस अवसर पर 35 भावी पत्रकारों ने श्री पुष्पेन्द्र सिंह विभागाध्यक्ष की अगुवाई में एवं 10 प्रशिक्षु शिक्षकों ने इस कार्यशाला का लाभ उठाकर वन्यप्राणी प्रबंधन से संबंधित प्रश्न पूंछकर अपनी शंकाओं का समाधान किया। विशेषज्ञ के रूप में श्री ए.पी. द्विवेदी, भूतपूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. एच.एस. पाबला, प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्य आयोजना, डॉ. सुरेन्द्र तिवारी, श्री सुहास कुमार, श्री एस.एस. राजपूत, श्री असीम श्रीवास्तव एवं श्री धनश्याम सक्सेना ने उपस्थित होकर वन्यप्राणी प्रबंधन के सभी क्षेत्रों पर अपने विचार व्यक्त करते हुये शंकाओं का समाधान किया। इस क्षेत्र में आने वाली कठिनाइयों पर भी विस्तृत विचार विमर्श करते हुये प्रशिक्षुओं द्वारा दिये गये सुझाओं को भी अमल में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
5 अक्टूबर 2009 के कार्यक्रम
प्रातः 6बजे से 8.30 बजे पक्षी अवलोकन शिविर का आयोजन।
प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक ईको क्लब के विद्यार्थियों हेतु एक दिन के वन्यप्राणी पालक की शिक्षा।
प्रातः 10 से फोटोग्राफी पर कार्यशाला एवं प्रतियोगिता का आयोजन।
प्रातः 10 बजे से विद्यालयीन वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन।

कलाकारों ने सहेजी पुरातन कला और संस्कृति
संस्कृति मंत्री श्री शर्मा ने शुभारम्भ किया शरदोत्सव
Satna:Sunday, October 4, 2009:Updated 20:21IST

संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने रामनाथ गोयनका घाट सियाराम कुटीर चित्रकूट में दीप प्रज्वलित कर शरदोत्सव कार्यक्रम की शुरूआत की। इस अवसर पर जिले के प्रभारी और वन राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, सांसद श्री गणेश सिंह, विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार, जनसंपर्क आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव, कलेक्टर श्री सुखवीर सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में भी हमारी प्राचीनकला एवं संस्कृति को हमारे कलाकारों ने सहेज के रखा हैं। यह हमारे देश के लिए गौरव की बात है। चित्रकूट में इन कलाकारों द्वारा प्रस्तुत हमारी प्राचीन कला एवं संस्कृति की बानगियाँ देखकर इस सच्चाई का बोध होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस मंच के माध्यम से हमारे कलाकार इस कला एवं संस्कृति की धरोहर को जनमानस में स्थापित करेंगे। श्री शर्मा ने आगे कहा कि शीघ्र ही प्रदेश की प्राचीन कलाओं को और भी निखारा जावेगा एवं प्रतिभाओं की गांवों से शहरों तक खोज भी की जावेगी।
शरदोत्सव में पारम्परिक नृत्य एवं गायिकी केन्द्रित समारोह मे गुटुमबाजा नृत्य-मध्यप्रदेश, शंखध्वनि-उडीसा, रणपा नृत्य-उडीसा, मयूर नृत्य, होली नृत्य-उत्तरप्रदेश, घूमर नृत्य, खोडिया नृत्य-हरियाणा के अलावा सुश्री मालिनी अवस्थी ने अवधी गायन की प्रस्तुतियां हुईं।
चित्रकूट महात्माओं की कर्मभूमि एवं तपोभूमि - मनोज श्रीवास्तव
जनसंपर्क आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे देश के महात्माओं की तपोभूमि चित्रकूट आदिकाल से ही पवित्र एवं निर्मल रहा है। उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश के केन्द्र बिन्दु पर स्थित यह तपोभूमि एवं कर्मभूमि हमारे देश की कला एवं संस्कृति के लिए प्राचीनकाल से ही प्रेरणा स्त्रोत रही है। अब हम लगातार, जिला प्रशासन, जनता एवं सांस्कृतिक विभाग के सहयोग से इस तपोभूमि में हमारे प्राचीन कला एवं संस्कृति गायन, नृत्य के कार्यक्रमों के माध्यम से हमारे देश के कोने-कोने की प्राचीन कलाओं से जनमानस को अवगत करा रहे हैं।
शरदोत्सव के समापन अवसर पर कार्यक्रम
शरद पूणिर्मा के अवसर पर चित्रकूट की पवित्र मंदाकिनी के तट पर प्रतिवर्षानुसार शरदोत्सव का आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट, जिला प्रशासन सतना और संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में चित्रकूट में किया जा रहा है। शरदोत्सव के समापन अवसर पर 5 अक्टूबर के कार्यक्रम सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय विद्यालय उद्यमिता विद्यापीठ दीनदयाल परिसर चित्रकूट में आयोजित होगें।
शरदोत्सव का समापन 5 अक्टूबर को किसान कल्याण तथा कृषि विकास, मछलीपालन मंत्री डॉ। रामकृष्ण कुसमारिया के मुख्य आतिथ्य में होगा। शरदोत्सव की समापन संध्या 5 अक्टूबर को सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक सुरेश वाडकर का गायन होगा। शरदोत्सव पर आज के कार्यक्रम सायं 7 बजे से प्रारंभ होगें।

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