नई ‌‌‌‌‌‌इबारत

गुरुवार, 31 मार्च 2022

बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के पत्र पर मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान

15 अप्रैल तक चुका सकेंगे किसान खरीफ फसल ऋण: शिवराज सिंह

28 मार्च को विधायक खत्री ने लिखा था मुख्यमंत्री जी को पत्र

प्रदेश पब्लिसिटी - भोपाल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को एक बड़ी सौगात देते हुए ऋण जमा करने की तिथि में बढ़ोतरी करते हुए 15 अप्रैल कर दी है। जिससे प्रदेश के किसानों को भुगतान करने में परेशानी नहीं होगी और न ही किसानों को देरी से होने वाले भुगतान पर ब्याज भी नहीं लगेगा। साथ ही बैंक ऋण भुगतान नहीं करने की दशा में डिफाल्टर भी नहीं होंगे। इससे पहले जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च थी। जिसके बाद ऋण पर ब्याज एवं डिफाल्टर होने की परेशानी हो रही थी।

उल्लेखनीय है कि किसानों पर पिछले 2 सालों से लॉक डाउन सहित अन्य भार का वहन करना पड़ा था। ऐसे में 4 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदी होना है और 31 मार्च तक किसानों को भुगतान करने की सीमा तय की गई थी। लेकिन बैरसिया विधायक विष्णु खत्री ने 28 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर  क्षेत्र के किसानों के साथ-साथ प्रदेश के किसानों की समस्या को उठाते हुए तत्काल पत्र लिखकर मांग की थी कि किसानों पर ऋण का बोझ है, जिसे वे फसल आने तक नहीं जमा कर सकते हैं। इसलिए ऋण जमा करने की अवधि में बढ़ोतरी की जाना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में वंदे-मातरम गान के साथ आरंभ हुई। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने  कहा कि किसानों के लिए खरीफ फसल का ऋण चुकाने की अंतिम तिथि 31 मार्च से बढ़ाकर 15 अप्रैल की जा रही है। किसानों को खरीफ फसल के लिए जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा  लिया गया था। लोन चुकाने की अवधि 31 मार्च को समाप्त हो रही थी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कई किसान भाई-बहन इस राशि को जमा नहीं करा पाए हैं। अवधि समाप्त होने के बाद वे डिफाल्टर हो जाएंगे और डिफाल्टर होने के बाद उन्हें अधिक ब्याज देना होगा। इसके दृष्टिगत  खरीफ फसल   का ऋण चुकाने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 अप्रैल की जा रही है, इससे किसानों को ऋण चुकाने में सुविधा होगी और वे डिफाल्टर नहीं होंगे।

बढ़ी हुई अवधि का 60 करोड़ रूपये राज्य सरकार भरेगी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बढ़ाई गई अवधि के लोन के ब्याज का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा, जिसकी राशि लगभग 60 करोड़ रूपये होगी। यह राशि किसानों की ओर से राज्य  सरकार द्वारा भरी जाएगी। इससे किसान अपने ऋण की राशि सुविधाजनक तरीके से भर सकेंगे और वे  डिफाल्टर भी नहीं हो पाएंगे।

विधायक विष्णु खत्री ने माना मुख्यमंत्री जी का आभार 

बैरसिया विधायक विष्णु खत्री ने ट्वीटर के माध्यम से स् जननायक आदरणीय मुख्यमंत्री जी द्वारा ऋण जमा करने की तिथि को 15 अप्रैल कर दिया गया है...। सदैव किसान हित एवं विकास में निर्णय लेने के लिए, संपूर्ण किसान भाईयों की तरफ से माननीय मुख्यमंत्री जी के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार..


शनिवार, 12 मार्च 2022

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

बुधवार, 14 नवंबर 2018

बैरसिया में ब्रह्मा, विष्णु और हरि के बीच होगा मुकाबला

ब्रह्मानंद रत्नाकर के नाम वापसी के सारे प्रयास विफल भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की बैरसिया विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। 'विष्णुÓ के सामने 'ब्रह्माÓ की ललकार होगी। वहीं कांग्रेस से जयश्री 'हरिÓकरण सीधे मुकाबले में उतर चुकी है जिससे मुकाबला रोमांचक हो गया है। भाजपा के विष्णु खत्री बैरसिया से मौजूदा विधायक हैं। उनके सामने होंगे भाजपा के बागी ब्रह्मानंद रत्नाकर जो निर्दलीय खड़े हैं। आज नाम वापसी का आखिरी दिन था और ब्रह्मानंद ने नामांकन वापस नहीं लिया है। पार्टी कार्यालय पर किया था प्रदर्शन ब्रह्मानंद रत्नाकर ने टिकट की दावेदारी के साथ ही सड़क से लेकर भाजपा कार्यालय पर भी प्रदर्शन किया था, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सक्रियता से टिकट की मांग की थी। वहीं भाजपा ने इस बार फिर विष्णु खत्री को रिपी
ट किया है। वो 2013 में बैरसिया से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। लेकिन टिकट की आस ब्रह्मानंद रत्नाकर को थी। जब टिकट नहीं मिला तो बागी तेवर दिखाते हुए उन्होंने निर्दलीय ही नामांकन दाखिल कर दिया। साल 2008 में ब्रह्मानंद रत्नाकर ने कांग्रेस के हीरालाल को इसी सीट पर 23 हजार वोट से हराया था। बैरसिया को भाजपा का किला माना जाता है। कांग्रेस महज दो बार इस सीट पर काबिज हो पाई है। साल 1957 और 1998 में। ब्रह्मा को मनाने सांसद संजर, जिपंअ नागर जुटे रहे बैरसिया विधानसभा से भाजपा के बागी प्रत्याशी ब्रह्मानंद रत्नाकर को मनाने के लिए सांसद आलोक संजर और जिला पंचायत अध्यक्ष मनमोहन नागर बैरसिया में सक्रिय रहे परंतु ब्रह्मानंद रत्नाकर से दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो पाई। जबकि ब्रह्मानंद रत्नाकर सक्रिय रूप से जनसंपर्क करते रहे।

बुधवार, 22 अगस्त 2018

पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का अस्थिकलश ईटखेड़ी से होगा रवाना

पुष्पांजलि अर्पित कर पार्वती नदी में होगा विसर्जन भोपाल। प्रदेश की जीवनदायनी नदी पार्वती नदी में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी का अस्थि कलश विसर्जित करने गुरुवार प्रात: 10 बजे राजधानी के ईंटखेड़ी ग्राम पंचायत से यात्रा निकलेगी। अस्थिविसर्जन यात्रा में क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री, मंत्री रामपाल सिंह, प्रदेश महामंत्री एवं सांसद मनोहर उंटवाल, प्रदेश मंत्री पंकज जोशी शामिल होंगे। अस्थि कलश के दर्शन एवं श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक-धार्मिक जन उपस्थित रहेंगे। उक्त जानकारी देते हुए भाजपा मंडल अध्यक्ष तीरथ सिंह मीणा, भूपत मीणा ने देते हुए बताया कि युग पुरुष भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश पर श्रद्धा के फूल अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सभी नागरिक भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि यात्रा ईंटखेड़ी से ग्राम पंचायत गोलखेड़ी, निपानिया, रतूआ, हर्राखेड़ा होते हुए बैरसिया पहुंचेगी। जहां से ग्राम पंचायत रूनाहा होते हुए पार्वती नदी पहुंचेगी। जहां विधि-विधान के साथ अस्थिकलश का विसर्जन किया जाएगा।

2 साल बाद विधायक खत्री को आई किसानों की याद

भूमिपूजन के बाद भी नहीं बना विद्युत सब स्टेशन, डीएम को लिखा पत्र रमेश चंद्र जोशी बैरसिया विधायक विष्णु खत्री द्वारा 2 वर्ष पूर्व धूमधाम से 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का उद्घाटन कर क्षेत्र के किसानों को 24 घंटे की विद्युत उपलब्धता के सपने दिखाए थे। इन्हीं सपनों को लेकर जी रहे किसानों ने बार-बार विद्युत कम्पनी और अपने क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री के पास बार-बार आवेदन दिया पर क्षेत्र के किसान थक हार कर खामोश हो गए। जब क्षेत्रीय लोगों को कहीं से कोई आशा की किरण नजर नहीं आई तो उन्होंने आंदोलन करने की रणनीति बनाई। उल्लेखनीय है कि बैरसिया क्षेत्र से विधायक चुने गए विधायक विष्णु खत्री ने चुनाव जीतने के बाद विभिन्न कार्ययोजनाओं के भूमिपूजन किए गए थे, परंतु कई योजनाएं जमीनी स्तर से गायब हो गईं। वहीं कई घोषणाएं तो आज तक अमल में नहीं आई हैं। ऐसा ही हुआ क्षेत्र के चंदेरी गांव में जहां 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का उद्घाटन तो कर दिया पर आज दिन तक उस स्थान पर कोई कार्य ही शुरू नहीं हुआ। विकास यात्रा के दौरान आई भूमिपूजन की याद उल्लेखनीय है कि विधायक विष्णु खत्री बैरसिया क्षेत्र में अपनी विकास यात्रा के साथ गांव-गांव भ्रमण कर रहे हैं। इस बीच उनका चंदेरी, राताताल, परवलिया, गुनगा, हिनोती आदि ग्रामों में जाने का प्रोग्राम है। इसी बीच उन्होंने विद्युत मंडल के डीएम को चंदेरी गांव में 33/11 केवी सब स्टेशन का कार्य प्रारंभ कर क्षेत्रिय काश्तकारों को इसका लाभ मिल सके। इस संबंध में मुलाकात कर पत्र प्रेषित किया है। जबकि क्षेत्र की जनता सब स्टेशन नहीं लगने से नाराज है। लाम्बाखेड़ा हाईस्कूल बनाने की घोषणा पर अमल विधायक विष्णु खत्री ने क्षेत्र के लाम्बाखेड़ा माध्यमिक स्कूल के एक कार्यक्रम में शिक्षा सत्र 2016 में हाईस्कूल बनाने की घोषणा की थी। क्षेत्र के लोग लगातार इस बाबद् मांग करते रहे। जबकि आसपास में पढऩे वाले छात्र एवं छात्राओं को 8वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद या तो स्कूल छोड़ देने पड़ता है या फिर करोंद या डीआईजी स्थित स्कूल में प्रवेश लेना को मजबूर होना पड़ता है। इनका कहना है क्षेत्र की जनता लगातार विधायक, ऊर्जा मंत्री और विद्युत वितरण कंपनी के चक्कर खा चुकी है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आ रही है। जबकि इस क्षेत्र में प्राथमिकता से सब स्टेशन बनना था, जिसकी मांग क्षेत्रवासी वर्षों से कर रहे हैं। ऐसे में यदि सब स्टेशन नहीं बन पाया तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन करने की रणनीति बना रही है। गोलू यादव सरपंच, ग्राम पंचायत चंदेरी

रविवार, 3 जून 2018

एक कार्यक्रम में मिले टास्क ने गायक बना दिया: मेहर

रमेश चंद्र जोशी यूं तो गेट टू गेदर कार्यक्रम में ऑफिसर हमेशा कोई ना कोई गतिविधियां किया करते हैं, जबलपुर में डिप्टी कमिश्नर रहते हुए एक कार्यक्रम में जाना हुआ था जहां मुझे मिले टास्क गायन ने मेरा जीवन ही बदल दिया, कार्यक्रम में संगीत के साथ-साथ मनोरंजक के कार्यक्रम का आयोजन था, जिसमें एक दूसरे को टास्क देकर उस पर मनोरंजन करना था, उसमें मिले टास्क मैं गायन का टास्क दिया गया जिस पर मैं झिझकते हुए मंच पर पहुंचा और अपनी पसंद का गीत जो मुझे उस समय कुछ याद था- ओह रे ताल मिले नदी के जल में, नदी मिले सागर में, सागर मिले कौन से जल में कोई जाने ना .... पेश किया तो उपस्थित सभी अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारी वाह-वाह कर उठे, जिससे मैं रोमांचित हो गया। सभी ने मुझे एक गायक के रूप में अपनी प्रतिभा को निखारने की सलाह दी। वहां उपस्थित हारमोनियम वादक मित्र से मैंने बाकायदा हारमोनियम सीखा और धीरे-धीरे मेरी गायकी कार्यक्रमों की जान बन गई। अब यह स्थिति है की कार्यक्रम के इनविटेशन बाद में छपते हैं लोग मुझे पहले आमंत्रित कर लेते हैं। यह कहना है अपर आयुक्त हाउसिंग बोर्ड संतोष कुमार मेहर का जिन्होंने अपनी कार्यकुशलता के साथ-साथ गायकी से अपने ऑफिसर्स और अधीनस्थ कर्मचारियों का दिल जीत लिया है। ऐसे ही व्यस्त समय के दौरान उनसे बातचीत करने का मौका मिला, तब उन्होंने काम के बीच में ही अपना वार्तालाप शुरू कर दिया और मुस्तैदी से कार्य निपटाते रहे। इस बीच उनकी बातों का मैं भी कायल हो गया, बात-बात में हंसी मजाक के साथ जब भी वक्त मिलता वह कोई ना कोई गीत गुनगुना लेते। उनके इस कार्य के बीच चाहे जितनी बड़ी फाइल आ जाए या किसी मुद्दे पर बातचीत हो वे निर्भीक होकर करने लगते और फिर बातचीत में लग जाते। इस बीच जब भी उन्हें समय मिलता वे कुछ गुनगुना देते या ऐसा हास्य का वाक्य छेड़ देते जिससे उपस्थित जन ठहाके लगाने से अपने आपको नहीं रोक पाते। यूं तो काम के बोझ से या मानसिक थकावट से लोगों को व्याकुल होते हुए देखा है, लेकिन अपने काम को एंजॉय करते हुए बहुत कम अधिकारियों को देखा है, ऐसे ही अधिकारी हैं अपर आयुक्त एसके मेहर जिन्होंने अपने काम के बल पर कई कार्यों में अपने विभाग के साथ साथ जनता और अधिकारियों के साथ राजनेताओं को भी खुश कर दिया है। उन्होंने विभागीय एवं व्यक्तिगत श्रेणी में कई अवॉर्ड जीते हैं और जो कार्य भी हाथ में लेते हैं, उन्हें समय सीमा में ही पूरा कर देते हैं। गायकी की विधा में पारंगण हो चुके अपर आयुक्त एसके मेहर ने अपने घर में एक स्टूडियो का भी निर्माण कर लिया है, जिसमें वह गायन और वादन के साथ-साथ अपना अभ्यास निरंतर करते रहते हैं। उन्होंने अपनी एक आर्केस्ट्रा टीम भी बना ली है जिसमें हाउसिंग बोर्ड की महिला कर्मचारी और दो युवतियां एवं युवक शामिल हैं, वे बखूबी पारिवारिक एवं निजी कार्यक्रमों में प्रस्तुति देते रहते हैं। साइकिल चलाने का भी रखते हैं शौक अपर आयुक्त एसके मेहर को साईकिल चलाने का भी शौक है, जब भी समय मिलता है वे सायकल चलाने निकल पढ़ते हैं। कम से कम 10 से 20 किलोमीटर तक साइकिल से घूमते-फिरते रहते हैं। उन्हें जब भी अवकाश मिलता है या समय मिलता है वे साइकल लेकर निकल पड़ते हैं। घूमने फिरने के शौकीन अपर आयुक्त एसके मेहर ने कार से करीब-करीब पूरा भारत घूम लिया है। पिता से मिला अनुशासित जीवन पिता से मिले अनुशासित जीवनच की वजह से उन्होंने अपनी प्रतिभा स्कूल कॉलेज में पढ़ाई में दिखाई। उसी अनुशासित जीवन कला का ही परिणाम है कि व्यस्त दिनचर्या के चलते अपने हुनर और शौक में रमे रहते हैं। अपने अंदर छिपी प्रतिभा जीवन काल के 35 साल बाद सामने आई और उसे अपना शौक बनाकर अब अपनी कला को प्रदर्शित करने से नहीं चुकते। जिससे सहयोगी और अधिकारी खुश कार्यक्रमों में खुश तो होते ही हैं वहीं लोग उन्हें महफिल की जान कहकर बुलाने लगे हैं। उनके जेहन में हर वक्त और हर एक के लिए एक गीत है जो हमेशा जुबान पर रहता है- राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है, दुख तो अपना साथी है।